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Children day special: बालक मन

बालक मन! की व्यथा निराली
कहता है मुझसे प्यार कर।
कहता है मुझसे प्यार कर।।
नहीं चाहिए धन दौलत,
ना तो, मैं चाहूं तेरा घर,
बस मां का आँचल दे दो तुम,
जिसमे सोऊ, मैं रातभर।
मुझे प्यार कर, बस प्यार कर।।

मन में न द्वेष न कपट किसी से,
ना कोमल मन में ख्वाब कोई।
ना कल की चिंता है मुझको,
ना मन मे है आज फिकर।
बस मां का आँचल तुम दे दो,
जिसमें लोटू मैं जी भरकर।
बस प्यार कर, मुझे प्यार कर।।

मोती जैसे नयन हमारे,
होठ गुलाब की पंखुड़ियां।
एक प्यारी सी मुस्कान बिखेरु
मां की एक पुचकार पर।
इस कोमल मन की सुंदरता को,
मत होने दो तुम तितर _बितर।
बस प्यार कर, बस प्यार कर।

मैं रुठुं भी, तो प्यार करो,
मैं रोऊँ भी तो प्यार करो।
मेरी हंसी चुराकर रखलो तुम,
जी भरके मुझसे प्यार करो।
मत मना करो जिद करने से,
मिटने दो मेरे मन का डर।
बस प्यार कर, बस प्यार कर।।
………To be continue Dr. Ravi Arya

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